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भव तारिणी भक्ति
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भव तारिणी भक्ति
आरती, चालीसा और दैनिक प्रार्थना का पावन आश्रय
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वैष्णव जन तो तेने कहिये (Vaishnav Jan To)

By D. Kumar | October 13, 2026

नरसी मेहता का करुणा, सेवा और विनम्रता पर केंद्रित गुजराती पद, देवनागरी लिपि में।

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ठुमक चलत रामचंद्र (Thumak Chalat Ramchandra)

By D. Kumar | October 13, 2026

बालराम की बाल-लीला और मातृस्नेह को चित्रित करता तुलसीदास का पारंपरिक पद।

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प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो (Prabhuji More Avgun)

By D. Kumar | October 13, 2026

विनम्रता और समदृष्टि का भाव जगाता सूरदास से सम्बद्ध पारंपरिक पद।

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पायो जी मैंने राम रतन धन पायो (Payo Ji Maine Ram Ratan Dhan Payo)

By D. Kumar | October 13, 2026

मीराबाई से सम्बद्ध पारंपरिक पद में नाम-स्मरण और सतगुरु के प्रति कृतज्ञता।

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    भव तारिणी भक्तिBHAVTARINI BHAKTI

    एक दीप भक्ति का, हर दिन।
    पारंपरिक पाठों का शांत, सुंदर और विज्ञापन-मुक्त आश्रय।

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    सर्वे भवन्तु सुखिनः।
    सर्वे सन्तु निरामयाः॥

    सबका मंगल हो।

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