येषां न विद्या — सुभाषित

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मंत्र व प्रार्थना

येषां न विद्या — सुभाषित

येषां न विद्या — सुभाषित का स्पष्ट पाठ। श्रद्धा से पढ़ें और संबंधित पाठों से जुड़ें।

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येषां न विद्या न तपो न दानं,
ज्ञानं न शीलं न गुणो न धर्मः ।
ते मर्त्यलोके भुविभारभूता,
मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥ [चाणक्य नीति / 10 / 7]

पाठ व संदर्भ

इस संग्रह में पाठ सरल अनुच्छेदों में दिया गया है। अलग परंपराओं में शब्दों और पाठ-क्रम में अंतर मिल सकता है।

पारंपरिक पाठ का संदर्भ

॥ सर्वदेव को प्रणाम ॥
पाठ व संस्करण

पारंपरिक भक्ति पाठ। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर मिल सकते हैं। परिचय और पठन-सहायता भव तारिणी भक्ति द्वारा तैयार किए गए हैं।