शिवरात्रि व्रत कथा — सार

मुखपृष्ठ/कथा संग्रह/शिवरात्रि व्रत कथा — सार

कथा संग्रह

शिवरात्रि व्रत कथा — सार

शिवरात्रि की एक प्रसिद्ध कथा में शिकारी रात भर बिल्व-वृक्ष पर ठहरता है। उसके जागरण और अनजाने में चढ़े बिल्व-पत्र शिव-आराधना के प्रसंग बनते हैं। पशुओं के साथ उसका संवाद धीरे-धीरे कर

सरल वाचन · डिवाइस की आवाज़

आपके डिवाइस की हिंदी आवाज़ से सरल वाचन। आवाज़ की उपलब्धता डिवाइस पर निर्भर है।

शिवरात्रि की एक प्रसिद्ध कथा में शिकारी रात भर बिल्व-वृक्ष पर ठहरता है। उसके जागरण और अनजाने में चढ़े बिल्व-पत्र शिव-आराधना के प्रसंग बनते हैं। पशुओं के साथ उसका संवाद धीरे-धीरे करुणा और अहिंसा की ओर ले जाता है।

इस लोककथा का केंद्र हृदय का परिवर्तन है। शिव-स्मरण के साथ दया, सत्य और संयम को जीवन में जगह देना इसका सरल संदेश है।

पाठ व संदर्भ

इस संग्रह में पाठ सरल अनुच्छेदों में दिया गया है। अलग परंपराओं में शब्दों और पाठ-क्रम में अंतर मिल सकता है।

विषय का संदर्भ

॥ शिव को प्रणाम ॥
पाठ व संस्करण

भव तारिणी भक्ति का मौलिक परिचय / कथा-सार। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर मिल सकते हैं। परिचय और पठन-सहायता भव तारिणी भक्ति द्वारा तैयार किए गए हैं।