प्रदोष व्रत — परिचय

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व्रत व पर्व

प्रदोष व्रत — परिचय

प्रदोष की आराधना त्रयोदशी की संध्या से जुड़ी है। भक्त शिव-पार्वती का स्मरण करते हैं और दिन के कार्यों से विराम लेकर शांत पाठ पढ़ते हैं।

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प्रदोष की आराधना त्रयोदशी की संध्या से जुड़ी है। भक्त शिव-पार्वती का स्मरण करते हैं और दिन के कार्यों से विराम लेकर शांत पाठ पढ़ते हैं।

पंचांग में तिथि और प्रदोष-काल स्थान तथा दिन के अनुसार बदलते हैं। पाठ-क्रम में शिव आरती, लिंगाष्टकम् या रुद्राष्टकम् रखा जा सकता है।

पाठ व संदर्भ

इस संग्रह में पाठ सरल अनुच्छेदों में दिया गया है। अलग परंपराओं में शब्दों और पाठ-क्रम में अंतर मिल सकता है।

विषय का संदर्भ

॥ शिव को प्रणाम ॥
पाठ व संस्करण

भव तारिणी भक्ति का मौलिक परिचय / कथा-सार। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर मिल सकते हैं। परिचय और पठन-सहायता भव तारिणी भक्ति द्वारा तैयार किए गए हैं।