दशरथ और शनिदेव — कथा-सार

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कथा संग्रह

दशरथ और शनिदेव — कथा-सार

कथा में राजा दशरथ अपनी प्रजा के लिए चिंतित होकर शनिदेव से प्रार्थना करते हैं। उनके साहस और स्तुति से प्रसन्न होकर शनिदेव वरदान देते हैं। इस प्रसंग से दशरथकृत शनि स्तोत्र की परंपरा

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कथा में राजा दशरथ अपनी प्रजा के लिए चिंतित होकर शनिदेव से प्रार्थना करते हैं। उनके साहस और स्तुति से प्रसन्न होकर शनिदेव वरदान देते हैं। इस प्रसंग से दशरथकृत शनि स्तोत्र की परंपरा जुड़ती है।

कथा को धार्मिक आख्यान के रूप में पढ़ें। इसका संदेश जिम्मेदारी, साहस और विनय है। संबंधित स्तोत्र, शनि चालीसा और आरती अगले पाठ के रूप में उपलब्ध हैं।

पाठ व संदर्भ

इस संग्रह में पाठ सरल अनुच्छेदों में दिया गया है। अलग परंपराओं में शब्दों और पाठ-क्रम में अंतर मिल सकता है।

विषय का संदर्भ

॥ शनि को प्रणाम ॥
पाठ व संस्करण

भव तारिणी भक्ति का मौलिक परिचय / कथा-सार। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर मिल सकते हैं। परिचय और पठन-सहायता भव तारिणी भक्ति द्वारा तैयार किए गए हैं।