संतोषी माता व्रत कथा — सार

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कथा संग्रह

संतोषी माता व्रत कथा — सार

संतोषी माता की लोककथा में सात पुत्रों वाले परिवार की उपेक्षित बहू और उसके दूर गए पति का प्रसंग आता है। स्त्री कठिन परिस्थिति में माता का स्मरण करती है। पति की वापसी और परिवार के बद

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संतोषी माता की लोककथा में सात पुत्रों वाले परिवार की उपेक्षित बहू और उसके दूर गए पति का प्रसंग आता है। स्त्री कठिन परिस्थिति में माता का स्मरण करती है। पति की वापसी और परिवार के बदलते व्यवहार के बीच व्रत तथा उद्यापन की घटनाएँ आती हैं।

कथा का भाव संतोष, आशा और परिवार में सम्मान है। अलग परिवारों की पूजा-पद्धति में अंतर हो सकता है; अपनी परंपरा का पालन करते हुए कथा का संदेश समझें।

पाठ व संदर्भ

इस संग्रह में पाठ सरल अनुच्छेदों में दिया गया है। अलग परंपराओं में शब्दों और पाठ-क्रम में अंतर मिल सकता है।

विषय का संदर्भ

॥ संतोषी माता को प्रणाम ॥
पाठ व संस्करण

भव तारिणी भक्ति का मौलिक परिचय / कथा-सार। पारंपरिक पाठों में क्षेत्रीय पाठांतर मिल सकते हैं। परिचय और पठन-सहायता भव तारिणी भक्ति द्वारा तैयार किए गए हैं।